“महात्मा फुले जयंती ” और

सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संवाद

Date: 11 April 2026

पीस सेंटर परिधि द्वारा 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक महात्मा फुले की जयंती से अंबेडकर जयंती तक चार दिवसीय “फुले से अंबेडकर विचार यात्रा” किया गया | इसी समय परिधि सृजन मेला का भी आयोजन कलाकेन्द्र भागलपुर मे हुआ | महात्मा फुले जिन्होंने सदियों से व्याप्त सामाजिक रूढ़ियों को मिटाने और मांजकर सम्यक भारतीय संस्कृति की जोत जलाई, को हार्दिक आभार के साथ याद करते हुए भागलपुर के संस्कृतिकर्मियों ने “परिधि सृजनमेला” का आगाज आज से कलाकेन्द्र, लाजपत पार्क में किया। पूरा परिसर फुले के जन्मोत्सव पर सजा हुआ है, बच्चे युवा महिलाएं महत्मा फुले की तस्वीर पर पुष्पांजलि कर संगीत संध्या में शिरकत की। शास्त्रीय,लोक और सुगम संगीत में एक से एक प्रतिभाएं उल्लासपूर्वक प्रतिस्पर्धा प्रदर्शित की । चित्र,शिल्प,मूर्ति,मंजूषा और मिथिला लोक कला की प्रदर्शनी कला दीर्घा की ओर आगत अतिथियों दर्शकों को लुभाती रही। साहित्य और पुस्तक प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र दिनकर पुस्तकालय द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी सह बिक्री का स्टाल भी हर वर्ष की भांति मेले में लगी हुई है।साहित्य,समसामयिक राजनीति समाज,दार्शनिक वैचारिक पुस्तकें एक साथ उपलब्ध कराई गई। एक स्वतंत्र गरिमा पूर्ण पंडाल में सांस्कृतिक अविभावक की तरह ज्योतिबा फुले और डॉ अम्बेडकर के भव्य चित्र लगे थे । आगंतुकगण  भावपूर्ण पुष्पांजलि करते रहे। ति. मां.वि.वि.भागलपुर के कुल सचिव डॉ रामाशीष पूर्वे और डीन, छात्र कल्याण डॉ अर्चना कुमारी साह ने सृजनमेला की कला प्रदर्शनी का विधिवत उदघाटन किया। स्वागत करते हुए परिधि के निदेशक उदय ने कहा- फुले अज्ञानता को विषमता की सबसे बड़ी वजह मानते थे।सम्यक रचना ही संस्कृति है । आज प्रकृति की लूट से न केवल पारिस्थितिकी असंतुलन पैदा हुआ है बल्कि विषमता भी बढ़ी है । प्रोफेसर योगेन्द्र ने कहा देश और समाज में बढ़ती चुनौतियों का मुकाबला करने को भावी पीढ़ी सृजन मेला जैसे आयोजनों और प्रक्रिया से ही संभव है। कलाकेन्द्र और परिधि के लगातार प्रयास सराहनीय हैं।

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Date: 11 to 14th April 2026

Location: कला केंद्र, भागलपुर  

Name of Event/Activity : सृजन मेला

Type of Activity : सांस्कृतिक कार्यक्रम

सृजन मेला मे सुबह 7 से  ही चित्रांकन की प्रतियोगिता में भागलपुर के विभिन्न स्कूलों से बच्चों ने भागीदारी की। बच्चों ने विभिन्न विषयों को चित्रात्मक अभिव्यक्ति दे रहे थे। अंग जनपद की लोक परंपरा मंजूषा चित्रकला में अपना हुनर दिखाने की प्रतियोगिता जूनियर और सीनियर — दो वर्गों में विभक्त थी। लोक कला को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोने का यह विशिष्ट प्रयास है।कविता पाठ की प्रतियोगिता में प्रकृति प्रेम और सामाजिक दायित्वों पर आधारित कविताओं का सस्वर पढ़ना था। विकास की आधुनिक परिभाषा में मिट्टी से जुड़ाव लगातार कमती जा रही है । ऐसे में बच्चों युवाओं में मिट्टी गूंथ कर उनसे कलाकृतियां बनाना सृजन का प्रासंगिक आयाम  हो — इस समझ से मिट्टी खिलौना निर्माण की प्रतियोगिता सम्पन्न हुई। शास्त्रीय नृत्य में भरत नाट्यम और कथक नृत्य की प्रतियोगिता आयोजित हुई । उन प्रतिभाओं को मंच देने का काम सृजन मेला बखूबी कर रहा है। प्रतिभागियों से ज्यादा उनके मां पिता अविभावक और प्रशिक्षकों में उत्साह दिख रहा था। कलाकेन्द्र परिसर रंग बिरंगे पोशाक में सजी धजी नृत्यांगनाओं से भर गया था। सृजन मेला के तीसरे दिन नाटक, माइम,समूह गीत,समूह नृत्य की कला प्रतिभाओं को परखने का रहा। निर्णायकगण प्रतिभाओं के परीक्षण में लगे रहे और दर्शकगण उनमें रोचकता, कथ्य की नूतनता और प्रस्तुति के प्रभावों में डूबते उतारते रहे। समूह गीत की प्रतियोगिता में विदेशिया,बिहुला गीत,गोदना गीत,मौसम गीत आदि लोक स्वर ज्यादा मुखर हुआ। समूह नृत्य संवर्ग में एक से एक प्रस्तुतियां हुईं।

मुख्य अतिथि सुन्दरवती महिला कॉलेज की प्राचार्य श्रीमति निशा झा ने कहा कि परिधि और कलाकेन्द्र का यह बहुआयामी आयोजन कला संस्कृति के समागम का नायाब उदाहरण है। क्लाइमेट जस्टिस और सामाजिक समरसता को संवेदित करती प्रस्तुतियां देख कर मैं विभोर हो रही हूँ। इतने बड़े दर्शक समुदाय को हमारे बीच के ही बच्चे सहज ही गम्भीर संदेश देने में सक्षम हुए हैं। मैं बच्चों को विशेष तौर पर बधाई देती हूं। वे निश्चय ही समाज और देश को आगे ले जाएंगे।

 विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगभग 700 प्रतिभागियों ने अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन किया और लगभग 4000 लोगों ने इस मेल में भागीदारी की

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Date: 14 April 2026

Time : 1-3 pm

Location: कहलगाँव, नवगछिया, कला केंद्र,

Name of Event/Activity : अंबेडकर जयंती

Type of Activity : सांस्कृतिक कार्यक्रम

14 अप्रैल 2026 को परिधि भागलपुर के द्वारा कालीघाट कागज़ी टोला कहलगांव नवगछिया और भागलपुर में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती, मनाया गया. बैठक में मछुआ, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, शामिल हुए डॉ भीम राव अम्बेडकर को माल्यार्पण किया गया सभा को संबोधित करते हुए योगेंद्र साहनी ने कहा कि डॉ भीम राव अम्बेडकर ने समाज में फैले ऊंच-नीच, भेदभाव, सामाजिक असमानता, गरीबों का हक, दलितों का अधिकार, दलितों को बोलने का अधिकार आदी की लड़ाई उन्होंने लड़ी।

वहीं दूसरी ओर सृजन मेल के मंच पर समावेशी संस्कृति को अक्षुण्णता प्रदान करने हेतु भारतीय संविधान को स्वरूप देने वाले बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती 14 अप्रैल 2026 को भागलपुर के कवियों संस्कृतिकर्मियों और कला प्रतिभाओं, दर्शकों ने अलग अंदाज से मनाया। न कोई राजनीति, न कोई भाषण, न नारेबाजी- सिर्फ काव्यात्मक और कलात्मक उद्गार तथा बाबा साहेब के प्रति स्नेह सम्मान और आभार।

मेले की शुरुआत 11 अप्रैल को महात्मा फुले की जयंती मनाते हुए की गई थी और समापन बाबा साहेब को नमन करते हुए। परिधि सृजन मेला में रूढ़ियों , अंधविश्वास, अपसंस्कृति के खिलाफ अग्रगामी विचारों को स्वर देते संगीत, नृत्य, नाटक, पेंटिंग्स, शिल्प ने भागलपुर की प्रखर रचनात्मकता को एक बार फिर से मजबूत स्थापना दी। मंच पर बाबा साहेब और फुले के आदमकद चित्रों को सजा दिया गया।

चित्र शिल्प और बाल कृतियों, मंजूषा चित्र,फोटोग्राफी प्रदर्शनी में दर्शकों का तांता लगा रहा,मधुर धीमे संगीत लहरियां प्रदर्शनी कलादीर्घा में गूंज रही। उधर रविंद्र रंगमंच भागलपुर के बिहार बंगाली समिति के कलाकारों से आच्छादित है।

उल्लास शांति का विरोधी नहीं, रचनात्मकता टिकाऊ प्रगति का पर्याय है –बिहार बंगाली समिति की प्रस्तुतियों में यही प्रतीत हो रहा था। रवींद्र संगीत की प्रस्तुति ने बंगीय संस्कृति की सुगंध बिखेर दिया। देश भक्ति गीत मुक्तिर मोनदिरे भी प्रस्तुत किया गया। मौके पर भागलपुर के चुनिंदा कवियों ने कविताओं की प्रस्तुति दी। उनके स्वर प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता लिए रही। प्राचार्य डॉ दीपो महतो ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे लोक जीवन की परंपरा लुप्त होती जा रही हैं, आज हम उन्हीं को सांस्कृतिक कलाओं के रूप में संजोने की कोशिश कर रहे हैं।आप बधाई के पात्र हैं । अम्बेडकर साहेब को ऐसे याद करना अद्भुत है।

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Date : 3-17 May 2026

Time:   2-5 pm

Location:   कलाकेन्द्र, भागलपुर

Name of Event/Activity:  “इंटर्नशिप प्रोग्राम सामाजिक सरोकार हेतु साहित्य-कला-संस्कृति”

Type of Activity : इंटर्नशिप प्रोग्राम

3 मई से 17 मई 2026 को कला केंद्र भागलपुर में एस एम कॉलेज के हिंदी विभाग की छात्राओं का चल रहे इंटर्नशिप प्रोग्राम आयोजित हुआ। एस एम कॉलेज की 104 छात्राओं ने इंटर्नशिप किया। इंटर्नशिप का टॉपिक था “सामाजिक सरोकार हेतु साहित्य–कला–संस्कृति”।   इंटर्नशिप की शुरुआत 3 मई को हुई थी और 17 मई को हुआ । ज्ञात हो नई शिक्षा नीति के तहत अपने विषय से इतर किसी अन्य संस्थान, संस्था या एनजीओ आदि के साथ न्यूनतम साठ ( 60 ) घंटे इंटर्नशिप करना है। समापन समारोह का आयोजन परिधि, कला केंद्र और एस एम कॉलेज की छात्राओं द्वारा संयुक्त रूप से हुआ। कार्यक्रम का संचालन और रिपोर्टिंग अलग अलग छात्राओ ने की। परिधि के निदेशक उदय ने कहा कि शुरू मे तो मुश्किल से लड़कियां सकुचाते हुए तैयार हुई थी, फिर बाद में रिपोर्टर बनने की होड़ लग गई। इसके अतिरिक्त कई गतिविधियों में लड़कियों संयोजन का मौका मिला। रिपोर्टिंग, दिवस नायिका और ग्रुप संयोजन से हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता बढ़ी। इंटर्नशिप में दृष्टि और क्षमता विकास दोनों पर ध्यान दिया गया। दृष्टि निर्माण प्रक्रिया के तहत जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वार्मिंग, पारिस्थितिकी असंतुलन,  पर्यावरणीय असंतुलन) जेंडर और सामाजिक सांस्कृतिक सह अस्तित्व पर चर्चा हुई. जबकि क्षमतावर्धन के तहत नाटक और चित्रकला से जुड़े कई अभ्यास कराए गए। मौके पर इंटर्नशीप के इंचार्ज डॉ दीपक कुमार दिनकर ने परिधि और कला केंद्र का आभार जताया और कहा कि आप लोगों ने हमारी छात्राओं को निःशुल्क  इंटर्नशीप कराकर अपनी संस्थाओं के उद्वेश्य और विजन मिशन को साबित किया है। हमने बहुत सोच समझकर हिंदी की छात्राओं के इंटर्नशिप के लिए परिधि और कला केंद्र को चुना था जिसकी अहमियत आप लोगों ने साबित कर दिया। एस एम कॉलेज हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष और इंटर्नशीप की सुपरभाइजर डॉ आशा ओझा ने कहा कि बहुत कम समय में आप प्रशिक्षकों ने हमारी छात्राओं के छुपे हुए गुण को उजागर कर दिया इतने कम समय में सभी लड़कियों द्वारा गीत और नाटक की प्रस्तुति अदभुत था। परिधि के निदेशक उदय ने कहा  कि हमारे लिए यह कार्यक्रम महज सर्टिफिकेट बांटने का कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्राओं को ज्ञान के निर्माण के लिए प्रेरित करने और सामाजिक परिवर्तन हेतु एक पीढ़ी तैयार करने का कार्यक्रम था। कला केंद्र के प्राचार्य राजीव राहुल ने कहा जब सीखने वाला ठीक हो तो सिखाने वाले को आनंद आनंद आता है। मौके पर संगीता और सुषमा ने भी प्रशिक्षण के अनुभव रखे . छात्राओं ने संगीता लिखित नारीवादी गीत ” फूल हम हैं हमही कली हैं, घर के बगीचे में ही खिली हैं,, तोड़ो न मोड़ो न नफरत से तोलो न, हर घर की बेटी का मान रखो… ” और ललन उदय लिखित पर्यावरण गीत  “जंगल धरती पानी बचाओ , जंगल धरती पहाड़ बचाओ”, “कितने मंदिर और बनेंगे,कितने मस्जिद और बनेंगे” का समूह गायन किया। लड़कियों ने नाटक एक था राजा एक थी रानी के एक अंश की प्रस्तुति भी की। निशा निश्चल और सृष्टि सुमन ने कार्यक्रम का संयोजन किया। समापन के अवसर पर 100 से अधिक छात्राओं सहित भागलपुर विश्वविद्यालय के पी आर ओ दीपक कुमार दिनकर, हिंदी विभाग की अध्यक्षा आशा ओझा तिवारी, उदय, कला केंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह, संगीता, मृदुला सिंह, जयप्रकाश कुमार, सुषमा कुमारी, अभिजीत कुमार, भरत कुमार आदि मौजूद थे।

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Date: 7 May 2026

Time : 2-5 pm

Location: कला केंद्र, भागलपुर  

Name of Event/Activity : रवींद्र जयंती

Type of Activity : संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम

दिनांक 7 मई 2026 को स्थानीय कला केंद्र में रविन्द्र नाथ ठाकुर की 165 वी जयंती पीस सेंटर परिधि द्वारा मनाई गई. कला केंद्र में रविन्द्र नाथ ठाकुर की भव्य मूर्ति बनी हुई है और बगल में ही रविन्द्र मंच भी है. इस अवसर पर मौजूद छात्राओं ने कहा कि रविन्द्र नाथ  ठाकुर एशिया में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे. रवि बाबू को उनकी कृति गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था. रविन्द्र नाथ ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे,  वरिष्ठ संस्कृति कर्मी उदय ने कहा – रवींद्रनाथ ठाकुर एक साथ कवि, गीतकार, कहानीकार, उपन्यासकार, चित्रकार और नाटककार थे. उन्होंने लगभग ढाई हजार के करीब गीत लिखे तथा उन गीतों की स्वरलिपि तैयार की जो रविन्द्र संगीत के नाम से पूरी दुनियां में प्रसिद्ध है. वे एक आध्यात्मिक और दार्शनिक व्यक्ति थे. रविन्द्र नाथ उच्च कोटि के शिक्षा शास्त्री थे. उनका मानना था कि प्रकृति सबसे बड़ा गुरु है. इसीलिए प्रकृति की गोद में उन्होंने शिक्षा  केंद्र खोला और नाम रखा शांति निकेतन. वे मानवतावादी और प्रकृतिवादी थे. शांति निकेतन उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था. छात्रों को तैयार करने में उनकी अहम भूमिका थी. गांधी ने जो उन्हें गुरुदेव कहा, सही मायने में वे इसके हकदार थे. कलाकेंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह उर्फ़ राहुल ने उन्हें श्रद्धांजलि देते कहा कि रविन्द्र नाथ ठाकुर का राष्ट्रवाद बहुभाषा और बहु संस्कृति पर आधारित था. वे विविधता के जबरदस्त पैरोकार थे. उनके लिखे दो गीत जन गण मन और अमार सोनार बांग्ला क्रमशः भारत और बंगला देश का राष्ट्रगान है. रंगकर्मी निरुपम कांति पाल ने कहा कि रविन्द्र नाथ ठाकुर 1912 ईस्वी में भागलपुर आए थे और यहाँ बंगीय साहित्य परिषद की स्थापना की. वे भारत की विविधता का सम्मान करते थे और विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय चाहते थे। इसी उद्देश्य से देश भर में घूम घूम कर ऐसे संस्थानों की स्थापना कर रहे थे। अभिजीत शंकर ने उन्हें मानवीय स्वभाव, मूल्य और अंतर मन के बेहतरीन चितेरे के  रूप में याद करते हुए उनके द्वारा रचित कई उपन्यासों का जिक्र किया. जिसमें मानव मानव के बीच के अनकहे व अपरिभाषित संबंधों को बहुत ही मार्मिक ढंग से  चित्रित किया है. इस अवसर पर रीया कुमारी, रूचि कुमारी, निधि कुमारी,गीतांजलि गुंजन,सृष्टि सुमन, अलका कुमारी आदि ने अपने विचार के साथ-साथ गुरुदेव की कविताओं का पाठ किया। मौके पर मूर्तिकार संजीव कुमार शर्मा ने टैगोर की प्रतिमा रंगकर्मी निरुपम कांति पॉल को भेंट की।

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Date :  4-9 June 2026

Time: 8-12 am

Location:   कलाकेन्द्र, भागलपुर

Name of Event/Activity: “सह रचना शिविर

Type of Activity : समर कैंप

4-9 जून 2026 को कला केंद्र एवं परिधि द्वारा आयोजित सह रचना शिविर का आयोजन हुआ। इस अवसर पर शिविर में तैयार कला सामग्रियों की प्रदर्शनी भी लगायी गयी। 4 जून से 9 जून तक सह रचना शिविर का आयोजन कलाकेंद्र भागलपुर में हुआ । शिविर में 30 बच्चे और 10 माताओं ने हिस्सा लिया। इन 6 दिनों में प्रतिभागियों ने सह अस्तित्व और साझी संस्कृति पर समूह चर्चा की एवं मिट्टी की मूर्ति और क्राफ्ट निर्माण किया। मिट्टी के साथ बच्चों का संबंध टूटता जा रहा है इसलिए मिट्टी के साथ खेलना और मिट्टी को महसूस करना हमारे कार्यशाला का केंद्रीय विषय रहा। मिट्टी, धरती और प्रकृति के साथ सहचर्य के बिना मानव संस्कृति व सभ्यता संभव नहीं. मानवीय मूल्य का विकास तभी होगा जब हम धरती और प्रकृति के साथ जीना सीखेंगे. सह रचना शिविर में प्रतिभागियों ने एक और जहां प्रकृति में रहने वाले कई प्रकार के जीव जंतुओं को मूर्ति कला में ढाला वहीं दूसरी ओर मानव मानव के अंतर संबंधों पर केंद्रित गतिविधियों को भी अपने कला का विषय वस्तु बनाया। आज समापन के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कला केंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिँह ने कहा कि हमारा उद्देश्य कि हम एक साथ मिलकर सामूहिक कला अभिव्यक्ति कर सकें. यह सामूहिक निर्माण हमें सामूहिकता का बोध ही नहीं करता बल्कि एक दूसरे के हाव-भाव, गुण -दोष को समझने का मौका भी प्रदान करता है। आज हमारा समाज न्यूक्लियर परिवार की ओर बढ़ रहा है तो इसकी विसंगतियों से भी हमें जूझना पड़ रहा है इसलिए सामूहिक अभिक्रम जरूरी है। हम ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रकृति, मानवता और सामूहिकता एक साथ महसूस करते हैं। शिविर के उत्प्रेरक के तौर पर सौरभ कुमार पासवान, स्वाति चौधरी, अभिजीत कुमार आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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Date: 20 June 2026

Time : 8-10 am

Location: कासिमपुर, भागलपुर  

Name of Event/Activity : “विविधता हमारी संस्कृति”

Type of Activity : संवाद

पीस सेंटर परिधि द्वारा कासिमपुर, भागलपुर में संवाद : “विविधता हमारी संस्कृति” का आयोजन छात्र-छात्राओं के बीच किया गया. इस मौके पर संयोजक राजीव एवं विनय कुमार भारती ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम जिस देश में है वह विविधताओं का देश है. अगर हम गौर करें तो विविधता ही हमारी संस्कृति है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक अलग-अलग धर्म और संस्कृतियों का प्रवाह देखने को मिलता है. कोई संस्कृति अचानक शुरू या अचानक खत्म नहीं होती है. एक ही राज्य में अगर हम एक छोर से दूसरी छोर तक चलना शुरू करें तो हमें संस्कृति, खान-पान, बोली भाषा में निरंतर परिवर्तन देखने को मिलेगा। ऐसे परिवर्तन को हम एक संस्कृति में बांधकर नहीं देख सकते. संस्कृति का मतलब ही है आदान-प्रदान से बना बोली व्यवहार. दुर्भाग्य से आज कुछ लोग एकल संस्कृति की बात कर रहे हैं. ऐसे विविधता भरे देश और समाज में एकल संस्कृति का अर्थ होगा किसी एक का वर्चस्व और शेष का उत्पीड़न. विनय कुमार भारती ने कहा कि आज हम यह नहीं बतला सकते कि हमने अपने खान-पान और पहनावे में कौन सी चीज किस से ग्रहण कर ली है। परंतु अब वह हमारे संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। जिस प्रकार कुर्ता पायजामा हमारे पहनावे का, बैंगन टमाटर शिमला मिर्च हमारे खानपान का उसी प्रकार दुनिया भर की भाषाओं के शब्द हमारी बोली भाषा का हिस्सा बन चुके हैं। अगर हम इस मर्म को समझ लेते हैं तो भाषा, नस्ल, खान-पान, पहनावा, रीति रिवाज आदि के नाम पर होने वाले विभेद और हिंसा को रोक सकते हैं. शिक्षक बीडी शर्मा ने मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश के अलग-अलग संस्कृतियों में होने वाले पर्व त्योहार की विस्तृत जानकारी देते हुए इसके भेद और आपसी समन्वय को रखते हुए कहा कि एक ही समय को कैसे अलग-अलग संस्कृति अलग-अलग त्यौहार के रूप में मनाता है यह देखने और समझने लायक है। हम किसी रीति रिवाज,बोलचाल या धर्म संस्कृति के कारण किसी को छोटा या बड़ा नहीं कह सकते। कासिमपुर के सामाजिक कार्यकर्ता रामचरित्र यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही हमारी संस्कृति है। सांस्कृतिक एकता का अर्थ है हम सभी की संस्कृति, रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें। हमारे देश में मोहर्रम के मौके पर कई स्थानों पर मुसलमान के साथ-साथ हिंदू भी ताजिया और निशान निकालते हैं. धार्मिक रूप से अलग होते हुए भी सांस्कृतिक तौर पर ये इसे अपना समझते हैं। यही समझ हमें एक बनाता है। अगर हम देश को मजबूत और खुशहाल देखना चाहते हैं तो हमें संस्कृति, धर्म, नस्ल,क्षेत्र, भाषा आदि के नाम पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना होगा।

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Date: 29 June 2026

Time : 3-6 pm

Location: कला केंद्र, भागलपुर  

Name of Event/Activity : “आखर प्रेम का”

Type of Activity : सांस्कृतिक कार्यक्रम

29 जून 2026 को कबीर जयंती के अवसर पर ढाई “आखर प्रेम का” कार्यक्रम कला केंद्र में परिधि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कला केंद्र और पीस सेंटर परिधि के इस कार्यक्रम में कबीर दोहे, कुंडलियां, साखी और निर्गुण गाये तथा अतिथियों ने कबीर की सीख पर मंतव्य रखे. संचालन करते हुए राहुल ने कहा कि कबीर एक साथ कवि, समाज सुधारक, धर्म सुधारक, संत और दार्शनिक थे। साईं इतना दीजिए जामे कुटुम समाय, मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जाय इन पंक्तियों में समाजवाद का बीज है। कबीर धर्म के नहीं धार्मिक पाखंड और धार्मिक कर्मकांड के प्रबल विरोधी थे। वे कमियाँ संत थे। काम करते हुए चिंतन मनन करते थे। उनके बारे में कहा जाता है “मसी कागद छुओ नहीं” मतलब वे पढ़े लिखे नहीं थे, आत्मज्ञानी थे। कबीर ने ढोंगी संत महात्माओं के आचरण पर काफी कटाक्ष किया है। उदय ने कहा कि कबीर कहा करते थे कि पढ़ने लिखने से कोई विद्वान नहीं होता है विद्वान वह है जो प्रेम के मर्म को समझता है। प्रेम मनुष्य समाज की अद्भुत निर्मिति है। प्रेम बढ़ता गया, समाज बढ़ता गया यानि हम सभ्य होते गए। वह प्रेम ही है जिसके कारण हमने विवाह की शुरुआत की, परिवार बनाया फिर गांव बसाये और धर्म जैसी संस्था भी बनाई। इसलिए प्रेम धर्म का मूल है और नफरत अधर्म और असभ्यता की निशानी। कबीर निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। निर्गुण मतलब जो नहीं है लेकिन है। कबीर के इष्ट भी राम थे, लेकिन कबीर का राम दशरथ काv कारण है कि वे दोनों धर्मों के अधिसंख्य  लोगों के प्रिय हैं। हिंदू और मुसलमान दोनों का दावा है कि वे हमारे हैं। एक जुलाहा इतना हो सकता है ये बात कुछ लोगों को नागवार गुजरी तो उन्होंने ये भी कह दिया कि कबीर ब्राह्मणी के पुत्र थे। कबीर आज भी गांव गांव में लोकप्रिय हैं क्योंकि उन्होंने कमकर की भाषा में बात की और आसपास के चीजों का उदाहरण दिया।

 कार्यक्रम में कबीर संगीत का आयोजन विनय कुमार भारती के संयोजन में हुआ। नाल पर संगत प्रमोद जी ने एवं गायन स्वर में बिनय कुमर भारती, मन सतसंगी, प्रेरणा स्वरूप, कृतिका मंजरी, रूपम कुमारी, वीणा, दीक्षा, चन्दन, विशाल, सृष्टि, लक्ष्मी आदि ने समा बांधा। डा. मनोज ने प्रेम के ब्यपक रूप की बात की. उन्होंने समस्त जीव जगत, नदी, पहाड़ से प्रेम की बात की। डा नीरज ने कहा कि प्रेम तभी बढेगा ज़ब हम मैं तत्व को ख़त्म करें. धर्म प्रेम तत्व में छिपा है। डॉ योगेंद्र ने धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड और लूट पर सवाल खड़ा किया। कबीर ने हिंदू धर्म में व्याप्त वर्ण व्यवस्था और जातिवाद के खिलाफ आवाज लगाई .

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